दयानन्द एंग्लो वैदिक ----- यथा नाम तथा गुण
आधुनिकता के साथ -साथ संस्कृतिक मूल्यों को सजों कर दृढता से पालन कर रहा है |१- अनुशासन को बढ़ावा देना
२- संस्कारों का विकास
३-सदाचारी , व्यवहार-कुशल, सफल बनाने में सहायक
सबको हो वेदों का ज्ञान |
सबका सब विधि हो कल्याण
बालकों को वेद पाठ पढ़ाने का उद्देश्य --------
----वेद पाठ के प्रति रूचि उत्पन्न करने का प्रयास
---- पाठों को कहानी के रूप में प्रस्तुत कर और रुचिकर बनाने का प्रयास
---- मुख्या घटनाओं को कंठस्थ करने का प्रयास
---- साकारात्मक गुणों का विकास करना
-----कल्पना शक्ति, स्मरणशक्ति , अभिव्यक्ति का विकास करना
---- नैतिक मूल्यों का विकास करना
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